हमने यह गणतंत्र मनाया.

>> Monday, 26 January 2009


देश प्रेम में अलख जगाकर,

अमर शहीदों की यादों में. 
झंडे नीचे शपथ उठाकर 
हमने यह गणतंत्र मनाया. 
फिर से हमने जड़ें सींचकर, 
अपने खून पसीने से, 
नई पौध को आगे लाकर, 
हमने यह गणतंत्र मनाया. 
झूठे वादे फिर से सुनकर, 
रटी रटाई भाषा में, 
फिर से सपने नए देखकर, 
हमने यह गणतंत्र मनाया. 
आशाओं की आस दिखाकर, 
भूखे बच्चों की आँखों में  
खूब मिठाई फिर से खाकर,  
हमने यह गणतंत्र मनाया. 
सपने टूटे फिर टकराकर, 
पिसते भारत के मन में, 
झूठी क़समें फिर से खाकर, 
हमने यह गणतंत्र मनाया. 
कुछ की जान हुई न्योछावर, 
कुछ कमरों में बैठे हैं 
अपना भ्रष्टाचार दिखा कर, 
हमने यह गणतंत्र मनाया. 
चाँद सतह पर आज पहुंचकर, 
देश जगा है अपनी   रौ में  
मेधा की अब ज्योति जलाकर, 
हमने यह गणतंत्र मनाया.`

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वेदना से वेदांत

>> Saturday, 17 January 2009










क्यों होगी थकान अब मुझको, 
जीवन ही संगीत बन गया. 
कविता फिर से प्रेम रूप में  
आयी इस एकाकी मन में. 
नींद खुली तो वंशी की धुन, 
पीत साँझ की मिलती लय में 
ढलती हैं सूरज की किरणें  
फिर से उगने के प्रण में. 
वन पथ की उदास रातें हैं, 
छाया की फिर से तलाश है 
चंदन वन की चंद सुगंधें, 
महक रही हैं अब तन में. 
पंछी रात समझ घर आए 
सकुचाये स्वर फिर मुस्काए 
दिल तो याद किया करता है
स्वप्न पुराने ले आंखों में. 
आंसू सूख बन गए मोती, 
भरी नींद में खुली पलक पर  
पूजन की ध्वनि पुनः सुनी है 
दो झांझर से इक धुन में.

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सर्दी आई सर्दी आई....

>> Friday, 16 January 2009

थर थर काँपे सारे बच्चे,  

पहने नहीं जो पूरे कपड़े, 
मुँह से भाप निकालें भाई  
सर्दी आई सर्दी आई.... 
गज़क मिठाई लड्डू खाएँ,  
मूँगफली का मज़ा उठायें,  
खाएं रेवड़ी और मिठाई  
सर्दी आई सर्दी आई......  
बाहर धूप नहीं है निकली,  
कोहरे में है हालत पतली, 
सर तक ढापें आज रजाई  
सर्दी आई सर्दी आई........  
जब भी हम बैठे पढ़ने को,  
मन करता है फिर सोने को,  
कम्बल में जब गर्मी आई 
सर्दी आई सर्दी आई.......  
सुबह सवेरे उठा करेंगें, 
खूब पढ़ाई किया करेंगें,  
कुर्सी मेज़ अभी लगवाई 
सर्दी आई सर्दी आई.......

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ये नेता

>> Thursday, 8 January 2009

जान गवां कर लाठी खाकर

देश किया आजाद जिन्होंने 
आज वही फिर बने निशाना 
रोते नेता आज अभी तक  
आगे बढ़कर उनको कोसें 
बातों में अब क्या है दम  
है समाज अब समता मूलक  
कोई किसी से कैसे कम ?

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