बिगड़ी फिजां

>> Tuesday, 17 February 2009

खुल के बोली फिजां चाँद पर कीचड़ फेंका,
भागे हैं अब चन्द्र छोड़ के आज मेनका.
उल्टा होता दांव लगाया था जो चौका,
नियति ने अब बना दिया है ख़ुद को छक्का.
लगी ७६ दफा बेचारे किससे रोएँ,
पापी प्रेम के साथ आज फिर तनहा रोएँ.

1 टिप्पणियाँ:

Anonymous 17 February 2009 at 08:56  

pothi pad pad jug mua,gyani hua na koi,
Dhai akhar prem ka pade so chand-fiza hoi...!!!

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