घर जब आती मेरी बिटिया !!

>> Friday, 21 May 2010

ख़्वाब अधूरे पूरे होते, मन में गीत नए फिर आते !
दिल में क़सक कहीं फिर उठती, घर जब आती मेरी बिटिया  !! !!

नन्हें क़दमों से फिर चलकर, छोटी झाड़ू हाथ में लेकर !
दो चोटी कर पायल पहने, घर जब आती मेरी बिटिया  !!   !!

दुखती माँ की पीठ हमेशा, छोटे हाथों खूब दबाकर !
गुड़ियों को फिर आज सुलाकर, घर जब आती मेरी बिटिया  !!

बढ़ती उम्र फैलते सपने, हर इच्छा का गला घोंटकर !
सकुचाती और खूब सिमटती, घर जब आती मेरी बिटिया  !!!!

पीहर से अब पति के घर तक, काम निरंतर करते करते !
दो दो घर को खूब समेटे,  घर जब आती मेरी बिटिया  !!

फिर दहेज़ के दाह में जलकर, अपना जीवन कहीं लुटाकर !
केवल यादों में ही होकर, घर जब आती मेरी बिटिया  !!

जीवन पल पल दांव लगाकर, सृष्टि नयी रच जाने में !
अपनी बेटी गोद में लेकर, घर जब आती मेरी बिटिया  !!

माँ पापा के बिना अधूरे, उनके बचपन उनके सपने !
सूनी आँखों प्यार खोजते, घर जब आती मेरी बिटिया  !!


मेरी हर धड़कन भारत के लिए है...

3 टिप्पणियाँ:

deepak 28 May 2010 at 07:13  

खुबसूरत कविता

Ridhi SinglA 6 September 2015 at 11:38  

Ati sunder

Ridhi SinglA 6 September 2015 at 11:39  

Ati sunder

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