चुनावी दोहे

>> Sunday, 15 March 2009

कल तक जिन नोटों पर, अपना था अधिकार ! 

अब पड़ती हैं उन पर, बस चुनाव की मार !!  
खाते पीते रोज़ थे, अपने राम सुजान !
गोपाला के भजन से, भूखे हैं रमजान !!  
पूडी सब्जी मिल रही, कल तक सबको खूब ! 
लैया चना खिला रहे, गधे खा रहे दूब !!  
माया के कल्याण में, मिश्रा दौडें आज ! 
हाथी के संग्राम में, अमर हो रहे काज !!

0 टिप्पणियाँ:

पिछली पांच रचनाएँ

सीधी खरी बात

  © Free Blogger Templates Joy by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP