इंतज़ार

>> Sunday, 5 August 2007

इंतज़ार ही करना था तो कहा होता एक बार,
हम तो तुम्हारी राह में हर हद से गुज़र जाते.
कैसा लगा है तुमको कुछ इंतज़ार करके,
अपनी कटी है आज तक बस इंतज़ार में.
लग जाते चार चाँद हैं इस इंतज़ार में,
आते दिखाई देते हैं वो सामने से जब.
तुमने किया है एक बार इंतज़ार बस,
कहने लगे हैं जिंदगी को अब इंतज़ार हम.
आने वालों का तो होता है इंतज़ार बस,
हम उनकी राह में जो कभी भी न आयेंगें.
क्यों किसलिए किया था तुमने इंतज़ार कल,
उनकी निगाह झुकती गई पूछने पे यह.....






HAR EK SE BARH KAR WO JO MERE KHUDA HAIN..
KARTE RAHE EK SHAAM KO BAS MERA INTEZAAR.......

MAT POOCHHO KATI KAISE JUDAI KI RAAT WO,
SHAYAD MAIN JEE SAKUNGA AB INTEZAAR KARKE.

MIL BAHUT HAIN TUMSE, HAR ROZ TO MAGAR....
TUM BIN HAMEN JEENA KABHI ACHCHHA NAHIN LAGTA....

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