कल हलकी हवा से ....

>> Friday, 3 August 2007















करते रहे मुकाबला , गिन गिन के तूफानों का ,
पुख्ता दरख्त टूट गए , कल हलकी हवा से !
बचता रहा जो आज तक , बरसात पत्थरों की से ,
वो आइना चकना -चूर हुआ , कल हलकी हवा से !!
शर्मा के झुक गई थी नज़र , उनकी एक बार ,
लहरा जो गया दामन , कल हलकी हवा से !!!
उस शाख पे किसीका था , मज़बूत आशियाना ,
जो आ गया ज़मीन पे , कल हलकी हवा से !!!!
मज़बूत सफीने के जो , अब तक थे ना -खुदा ,
बहते हुए दिखे थे वो , कल हलकी हवा से !!!!!
उसका मेरे मरासिम , वैसे तो था पुराना ,
खिंचता पड़ा दिखाई वो , कल हलकी हवा से !!!!!!

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